prayer and meditations

Genesis 1:1 – Genesis 2:3 – उत्पत्ति 1:1 – उत्पत्ति 2:3 – 創世記 1:1 – 創世記 2:3

आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को बनाया। पृथ्वी बेडौल और सुनसान थी। धरती पर कुछ भी नहीं था। समुद्र पर अंधेरा छाया था और परमेश्वर की आत्मा जल के ऊपर मण्डराती थी।

तब परमेश्वर ने कहा, “उजियाला हो”और उजियाला हो गया।परमेश्वर ने उजियाले को देखा और वह जान गया कि यह अच्छा है। तब परमेश्वर ने उजियाले को अंधियारे से अलग किया।परमेश्वर ने उजियाले का नाम “दिन” और अंधियारे का नाम “रात” रखा। शाम हुई और तब सवेरा हुआ। यह पहला दिन था।

तब परमेश्वर ने कहा, “जल को दो भागों में अलग करने के लिए वायुमण्डल [c] हो जाए।”इसलिए परमेश्वर ने वायुमण्डल बनाया और जल को अलग किया। कुछ जल वायुमण्डल के ऊपर था और कुछ वायुमण्डल के नीचे।परमेश्वर ने वायुमण्डल को “आकाश” कहा! तब शाम हुई और सवेरा हुआ। यह दूसरा दिन था।

और तब परमेश्वर ने कहा, “पृथ्वी का जल एक जगह इकट्ठा हो जिससे सूखी भूमि दिखाई दे” और ऐसा ही हुआ। परमेश्वर ने सूखी भूमि का नाम “पृथ्वी” रखा और जो पानी इकट्ठा हुआ था, उसे “समुद्र” का नाम दिया। परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है।

तब परमेश्वर ने कहा, “पृथ्वी, घास, पौधे जो अन्न उत्पन्न करते हैं, और फलों के पेड़ उगाए। फलों के पेड़ ऐसे फल उत्पन्न करें जिनके फलों के अन्दर बीज हों और हर एक पौधा अपनी जाति का बीज बनाए। इन पौधों को पृथ्वी पर उगने दो” और ऐसा ही हुआ। पृथ्वी ने घास और पौधे उपजाए जो अन्न उत्पन्न करते हैं और ऐसे पेड़, पौधे उगाए जिनके फलों के अन्दर बीज होते हैं। हर एक पौधे ने अपने जाति अनुसार बीज उत्पन्न किए और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है। तब शाम हुई और सवेरा हुआ। यह तीसरा दिन था।

तब परमेश्वर ने कहा, “आकाश में ज्योति होने दो। यह ज्योति दिन को रात से अलग करेंगी। यह ज्योति एक विशेष चिन्ह के रूप में प्रयोग की जाएंगी जो यह बताएंगी कि विशेष सभाएं कब शुरू की जाएं और यह दिनों तथा वर्षों के समय को निश्चित करेंगी। पृथ्वी पर प्रकाश देने के लिए आकाश में ज्योति ठहरें” और ऐसा ही हुआ।

तब परमेश्वर ने दो बड़ी ज्योतियाँ बनाईं। परमेश्वर ने उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर राज करने के लिए बनाया और छोटी को रात पर राज करने के लिए बनाया। परमेश्वर ने तारे भी बनाए। परमेश्वर ने इन ज्योतियों को आकाश में इसलिए रखा कि वेह पृथ्वी पर चमकें। परमेश्वर ने इन ज्योतियों को आकाश में इसलिए रखा कि वह दिन तथा रात पर राज करें। इन ज्योतियों ने उजियाले को अंधकार से अलग किया और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है।

तब शाम हुई और सवेरा हुआ। यह चौथा दिन था।

तब परमेश्वर ने कहा, “जल, अनेक जलचरों से भर जाए और पक्षी पृथ्वी के ऊपर वायुमण्डल में उड़ें।” इसलिए परमेश्वर ने समुद्र में बहुत बड़े—बड़े जलजन्तु बनाए। परमेश्वर ने समुद्र में विचरण करने वाले प्राणियों को बनाया। समुद्र में भिन्न—भिन्न जाति के जलजन्तु हैं। परमेश्वर ने इन सब की सृष्टि की। परमेश्वर ने हर तरह के पक्षी भी बनाए जो आकाश में उड़ते हैं। परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है।

परमेश्वर ने इन जानवरों को आशीष दी, और कहा, “जाओ और बहुत से बच्चे उत्पन्न करो और समुद्र के जल को भर दो। पक्षी भी बहुत बढ़ जाएं।”

तब शाम हुई और सवेरा हुआ। यह पाँचवाँ दिन था।

तब परमेश्वर ने कहा, “पृथ्वी हर एक जाति के जीवजन्तु उत्पन्न करे। बहुत से भिन्न जाति के जानवर हों। हर जाति के बड़े जानवर और छोटे रेंगनेवाले जानवर हों और यह जानवर अपनी जाति के अनुसार और जानवर बनाएं” और यही सब हुआ।

तो, परमेश्वर ने हर जाति के जानवरों को बनाया। परमेश्वर ने जंगली जानवर, पालतू जानवर, और सभी छोटे रेंगनेवाले जीव बनाए और परमेश्वर ने देखा कि यह अच्छा है।

तब परमेश्वर ने कहा, “अब हम मनुष्य बनाएं। हम मनुष्य को अपने स्वरूप जैसा बनाएगे। मनुष्य हमारी तरह होगा। वह समुद्र की सारी मछलियों पर और आकाश के पक्षियों पर राज करेगा। वह पृथ्वी के सभी बड़े जानवरों और छोटे रेंगनेवाले जीवों पर राज करेगा।”

इसलिए परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में [d] बनाया। परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरुप में सृजा। परमेश्वर ने उन्हें नर और नारी बनाया। परमेश्वर ने उन्हें आशीष दी। परमेश्वर ने उनसे कहा, “तुम्हारी बहुत सी संताने हों। पृथ्वी को भर दो और उस पर राज करो। समुद्र की मछलियों और आकाश के पक्षियों पर राज करो। हर एक पृथ्वी के जीवजन्तु पर राज करो।”

परमेश्वर ने कहा, “देखो, मैंने तुम लोगों को सभी बीज वाले पेड़ पौधे और सारे फलदार पेड़ दिए हैं। ये अन्न तथा फल तुम्हारा भोजन होगा। मैं प्रत्येक हरे पेड़ पौधो जानवरों के लिए दे रहा हूँ। ये हरे पेड़—पौधे  उनका भोजन होगा। पृथ्वी का हर एक जानवर, आकाश का हर एक पक्षी और पृथ्वी पर रेंगने वाले सभी जीवजन्तु इस भोजन को खाएंगे।” ये सभी बातें हुईं।

परमेश्वर ने अपने द्वारा बनाई हर चीज़ को देखा और परमेश्वर ने देखा कि हर चीज़ बहुत अच्छी है।शाम हुई और तब सवेरा हुआ। यह छठवाँ दिन था।

इस तरह पृथ्वी, आकाश और उसकी प्रत्येक वस्तु की रचना पूरी हुई। परमेश्वर ने अपने किए जा रहे काम को पूरा कर लिया। अतः सातवें दिन परमेश्वर ने अपने काम से विश्राम किया। परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीषित किया और उसे पवित्र दिन बना दिया। परमेश्वर ने उस दिन को पवित्र दिन इसलिए बनाया कि संसार को बनाते समय जो काम वह कर रहा था उन सभी कार्यों से उसने उस दिन विश्राम किया।

起初,神創造天地。地是空虛混沌,淵面黑暗,神的靈運行在水面上。神說:「要有光。」就有了光。神看光是好的,就把光暗分開了。神稱光為晝,稱暗為夜。有晚上,有早晨,這是頭一日。

神說:「諸水之間要有空氣,將水分為上下。」神就造出空氣,將空氣以下的水、空氣以上的水分開了。事就這樣成了。神稱空氣為天。有晚上,有早晨,是第二日。

神說:「天下的水要聚在一處,使旱地露出來。」事就這樣成了。神稱旱地為地,稱水的聚處為海。神看著是好的。神說:「地要發生青草和結種子的菜蔬,並結果子的樹木,各從其類,果子都包著核。」事就這樣成了。於是地發生了青草和結種子的菜蔬,各從其類;並結果子的樹木,各從其類,果子都包著核。神看著是好的。有晚上,有早晨,是第三日。

神說:「天上要有光體,可以分晝夜,做記號,定節令、日子、年歲,並要發光在天空,普照在地上。」事就這樣成了。於是神造了兩個大光,大的管晝,小的管夜,又造眾星。 就把這些光擺列在天空,普照在地上,管理晝夜,分別明暗。神看著是好的。有晚上,有早晨,是第四日。

神說:「水要多多滋生有生命的物,要有雀鳥飛在地面以上、天空之中。」神就造出大魚和水中所滋生各樣有生命的動物,各從其類;又造出各樣飛鳥,各從其類。神看著是好的。 神就賜福給這一切,說:「滋生繁多,充滿海中的水,雀鳥也要多生在地上。」有晚上,有早晨,是第五日。

24 神說:「地要生出活物來,各從其類;牲畜、昆蟲、野獸,各從其類。」事就這樣成了。 25 於是神造出野獸,各從其類;牲畜,各從其類;地上一切昆蟲,各從其類。神看著是好的。

神說:「我們要照著我們的形象,按著我們的樣式造人,使他們管理海裡的魚、空中的鳥、地上的牲畜和全地,並地上所爬的一切昆蟲。」 27 神就照著自己的形象造人,乃是照著他的形象,造男造女。神就賜福給他們,又對他們說:「要生養眾多,遍滿地面,治理這地,也要管理海裡的魚、空中的鳥和地上各樣行動的活物。」神說:「看哪,我將遍地上一切結種子的菜蔬和一切樹上所結有核的果子,全賜給你們做食物。至於地上的走獸和空中的飛鳥,並各樣爬在地上有生命的物,我將青草賜給牠們做食物。」事就這樣成了。 神看著一切所造的都甚好。有晚上,有早晨,是第六日。

天地萬物都造齊了。到第七日,神造物的工已經完畢,就在第七日歇了他一切的工,安息了。神賜福給第七日,定為聖日,因為在這日神歇了他一切創造的工,就安息了。

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