Hebrews chapter 6 – इब्रानियों – 希伯來書

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Therefore let us leave the elementary doctrine of Christ and go on to maturity, not laying again a foundation of repentance from dead works and of faith toward God, and of instruction about washings, the laying on of hands, the resurrection of the dead, and eternal judgment. And this we will do if God permits. For it is impossible, in the case of those who have once been enlightened, who have tasted the heavenly gift, and have shared in the Holy Spirit, and have tasted the goodness of the word of God and the powers of the age to come, and then have fallen away, to restore them again to repentance, since they are crucifying once again the Son of God to their own harm and holding him up to contempt. For land that has drunk the rain that often falls on it, and produces a crop useful to those for whose sake it is cultivated, receives a blessing from God. But if it bears thorns and thistles, it is worthless and near to being cursed, and its end is to be burned.

Though we speak in this way, yet in your case, beloved, we feel sure of better things—things that belong to salvation. For God is not unjust so as to overlook your work and the love that you have shown for his name in serving the saints, as you still do. And we desire each one of you to show the same earnestness to have the full assurance of hope until the end, so that you may not be sluggish, but imitators of those who through faith and patience inherit the promises.

For when God made a promise to Abraham, since he had no one greater by whom to swear, he swore by himself, saying, “Surely I will bless you and multiply you.” And thus Abraham, having patiently waited, obtained the promise. For people swear by something greater than themselves, and in all their disputes an oath is final for confirmation. So when God desired to show more convincingly to the heirs of the promise the unchangeable character of his purpose, he guaranteed it with an oath, so that by two unchangeable things, in which it is impossible for God to lie, we who have fled for refuge might have strong encouragement to hold fast to the hope set before us. We have this as a sure and steadfast anchor of the soul, a hope that enters into the inner place behind the curtain, where Jesus has gone as a forerunner on our behalf, having become a high priest forever after the order of Melchizedek.

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अतः आओ, मसीह सम्बन्धी आरम्भिक शिक्षा को छोड़ कर हम परिपक्वता की ओर बढ़ें। हमें उन बातों की ओर नहीं बढ़ना चाहिए जिनसे हमने शुरूआत की जैसे मृत्यु की ओर ले जाने वाले कर्मों के लिए मनफिराव, परमेश्वर में विश्वास, बपतिस्माओं  की शिक्षा हाथ रखना, मरने के बाद फिर से जी उठना और वह न्याय जिससे हमारा भावी अनन्त जीवन निश्चित होगा। और यदि परमेश्वर ने चाहा तो हम ऐसा ही करेंगे।

जिन्हें एक बार प्रकाश प्राप्त हो चुका है, जो स्वर्गीय वरदान का आस्वादन कर चुके हैं, जो पवित्र आत्मा के सहभागी हो गए हैं जो परमेश्वर के वचन की उत्तमता तथा आने वाले युग की शक्तियों का अनुभव कर चुके हैं, यदि वे भटक जाएँ तो उन्हें मन-फिराव की ओर लौटा लाना असम्भव है। उन्होंने जैसे अपने ढंग से नए सिरे से परमेश्वर के पुत्र को फिर क्रूस पर चढ़ाया तथा उसे सब के सामने अपमान का विषय बनाया।

वे लोग ऐसी धरती के जैसे हैं जो प्रायः होने वाली वर्षा के जल को सोख लेती है, और जोतने बोने वाले के लिए उपयोगी फसल प्रदान करती है, वह परमेश्वर की आशीष पाती है।किन्तु यदि वह धरती काँटे और घासफूस उपजाती है, तो वह बेकार की है। और उसे अभिशप्त होने का भय है। अन्त में उसे जला दिया जाएगा।

हे प्रिय मित्रो, चाहे हम इस प्रकार कहते हैं किन्तु तुम्हारे विषय में हमें इससे भी अच्छी बातों का विश्वास है-बातें जो उद्धार से सम्बन्धित हैं। तुमने परमेश्वर के जनों की निरन्तर सहायता करते हुए जो प्रेम दर्शाया है, उसे और तुम्हारे दूसरे कामों को परमेश्वर कभी नहीं भुलाएगा। वह अन्यायी नहीं है। हम चाहते हैं कि तुममें से हर कोई जीवन भर ऐसा ही कठिन परिश्रम करता रहे। यदि तुम ऐसा करते हो तो तुम निश्चय ही उसे पा जाओगे जिसकी तुम आशा करते रहे हो। हम यह नहीं चाहते कि तुम आलसी हो जाओ। बल्कि तुम उनका अनुकरण करो जो विश्वास और धैर्य के साथ उन वस्तुओं को पा रहे हैं जिनका परमेश्वर ने वचन दिया था।

जब परमेश्वर ने इब्राहीम से प्रतिज्ञा की थी, तब स्वयं उससे बड़ा कोई और नहीं था, जिसकी शपथ ली जा सके, इसलिए अपनी शपथ लेते हुए वह  कहने लगा, “निश्चय ही मैं तुझे आशीर्वाद दूँगा तथा मैं तुझे अनेक वंशज दूँगा।”और इस प्रकार धीरज के साथ बाट जोहने के बाद उसने वह प्राप्त किया, जिसकी उससे प्रतिज्ञा की गयी थी।

लोग उसकी शपथ लेते हैं, जो कोई उनसे महान होता है और वह शपथ सभी तर्क-वितर्को का अन्त करके जो कुछ कहा जाता है, उसे पक्का कर देती है। परमेश्वर इसे उन लोगों के लिए, पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता था, जिन्हें उसे पाना था, जिसे देने की उसने प्रतिज्ञा की थी कि वह अपने प्रयोजन को कभी नहीं बदलेगा। इसलिए अपने वचन के साथ उसने अपनी शपथ को जोड़ दिया। तो फिर यहाँ दो बातें हैं-उसकी प्रतिज्ञा और उसकी शपथ-जो कभी नहीं बदल सकतीं और जिनके बारे में परमेश्वर कभी झूठ नहीं कह सकता।

इसलिए हम जो परमेश्वर के निकट सुरक्षा पाने को आए हैं और जो आशा उसने हमें दी है, उसे थामे हुए हैं, अत्यधिक उत्साहित हैं। इस आशा को हम आत्मा के सुदृढ़ और सुनिश्चित लंगर के रूप में रखते हैं। यह परदे के पीछे भीतर से भीतर तक पहुँचती है। जहाँ यीशु ने हमारी ओर से हम से पहले प्रवेश किया। वह मिलिकिसिदक की परम्परा में सदा सर्वदा के लिए प्रमुख याजक बन गया।

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所以,我們應當離開基督道理的開端,竭力進到完全的地步,不必再立根基,就如那懊悔死行、信靠神、各樣洗禮、按手之禮、死人復活,以及永遠審判各等教訓。神若許我們,我們必如此行。論到那些已經蒙了光照,嘗過天恩的滋味,又於聖靈有份,並嘗過神善道的滋味,覺悟來世權能的人,若是離棄道理,就不能叫他們重新懊悔了。因為他們把神的兒子重釘十字架,明明地羞辱他。就如一塊田地,吃過屢次下的雨水,生長菜蔬,合乎耕種的人用,就從神得福;若長荊棘和蒺藜,必被廢棄,近於咒詛,結局就是焚燒。

親愛的弟兄們,我們雖是這樣說,卻深信你們的行為強過這些,而且近乎得救。因為神並非不公義,竟忘記你們所做的工和你們為他名所顯的愛心,就是:先前伺候聖徒,如今還是伺候。我們願你們各人都顯出這樣的殷勤,使你們有滿足的指望,一直到底;並且不懈怠,總要效法那些憑信心和忍耐承受應許的人。

當初神應許亞伯拉罕的時候,因為沒有比自己更大可以指著起誓的,就指著自己起誓,說: 「論福,我必賜大福給你;論子孫,我必叫你的子孫多起來。」這樣,亞伯拉罕既恆久忍耐,就得了所應許的。人都是指著比自己大的起誓,並且以起誓為實據,了結各樣的爭論。照樣,神願意為那承受應許的人格外顯明他的旨意是不更改的,就起誓為證。藉這兩件不更改的事——神決不能說謊——好叫我們這逃往避難所、持定擺在我們前頭指望的人可以大得勉勵。我們有這指望,如同靈魂的錨,又堅固又牢靠,且通入幔內;做先鋒的耶穌既照著麥基洗德的等次成了永遠的大祭司,就為我們進入幔內。

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